झारखंड के प्रत्येक व्यक्ति पर 26 हजार रुपये का कर्ज, 46% लोग अब भी गरीब…


झारखंड के प्रत्येक व्यक्ति पर 26 हजार रुपये का कर्ज, 46% लोग अब भी गरीब। 2014-15 से झारखंड में प्रत्येक व्यक्ति कर्ज लगभग दोगुना हो गया है। वर्ष 2014-15 में यह लगभग 12 हजार करोड़ था, जो वर्ष 2018-19 में बढ़कर 22 हजार करोड़ और 2019-20 में 25 हजार करोड़ हो गया।





झारखंड की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2021-22 में बढ़ती कर्ज का भी उल्लेख किया गया है। यह स्पष्ट रूप से कहा गया था कि राजकोषीय घाटे में वृद्धि के परिणामस्वरूप ऋण का बोझ बढ़ गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2014-15 और 2019-20 के बीच, राज्य का शुद्ध ऋण 12.2 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ा है। वर्ष 2014-15 में सार्वजनिक ऋण सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 20 प्रतिशत था, जो 2015-16 से 27 प्रतिशत था। 2014-15 से प्रति व्यक्ति ऋण भी लगभग दोगुना हो गया है। वर्ष 2014-15 में यह लगभग 12 हजार करोड़ था, जो वर्ष 2018-19 में बढ़कर 22 हजार करोड़ और 2019-20 में 25 हजार करोड़ हो गया।





झारखंड के प्रत्येक व्यक्ति पर 26 हजार रुपये का कर्ज, 46% लोग अब भी गरीब। 2014-15 से झारखंड में प्रत्येक व्यक्ति कर्ज लगभग दोगुना हो गया है। वर्ष 2014-15 में यह लगभग 12 हजार करोड़ था, जो वर्ष 2018-19 में बढ़कर 22 हजार करोड़ और 2019-20 में 25 हजार करोड़ हो गया।




झारखंड के प्रत्येक व्यक्ति पर 26 हजार रुपये का कर्ज,ओपीएचआई और यूएनडीपी द्वारा 2019 में जारी वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक के हवाले से आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि 2005-06 से 2015-16 तक दस साल की अवधि में झारखंड के लगभग 72 लाख लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं। इस अवधि के दौरान, राज्य में गरीबी का प्रतिशत 74.7 से घटकर 46.5 प्रतिशत हो गया।