गिरफ्तार हुआ एक गैर-आदिवासी जाति प्रमाण पत्र धारक, प्रमाणपत्र रद्द कर दिया गया और नौकरी से निकाल दिया गया...

A non-tribal caste certificate holder was arrested

ऑल इंडिया ट्राइबल डेवलपमेंट काउंसिल और ऑल ट्राइबल सदरी सुशारिया एसोसिएशन द्वारा आरोपों के आधार पर उनके जाति प्रमाण पत्र पर सुनवाई के लिए कैनिंग उप-मंडल अधिकारी ने दक्षिण 24 परगना जिले के सराची अंबिकाचरण हाई स्कूल के एक शिक्षक मदन मोहन सरदार को नोटिस जारी किए। नोटिस मिलने के बाद मदन मोहन सरदार 24 नवंबर 2020 को कैनिंग एसडीओ कार्यालय में उपस्थित हुए थे। इस सभा में अखिल भारतीय आदिवासी बिकास परिषद और दक्षिण 24 परगना के अध्यक्ष महिमचंद्र सरदार और पश्चिम बंगाल आदिवासी विकास और तपस सरदार के प्रतिनिधि थे, जो ऑल आदिवासी सदन सुशासन एसोसिएशन के सचिव उपस्थिति थे । पूछताछ के दौरान, यह पता चला कि मदन मोहन सरदार वास्तव में अनुसूचित जाति (sc) पंडरा समुदाय के थे। जब उनसे आदिवासी समाज के विभिन्न रीति-रिवाजों और भाषा के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इन सभी बातों की जानकारी नहीं है क्योंकि उनके पास पंडरा पारा में उनका घार है।



लेकिन मदन मोहन सरदार के प्रमाण पत्र की स्थिति की खोज के बाद, पता चला कि अनेह अनुसूचित जाति (sc) प्रमाण पत्र व उनके के नाम पर 16 नवंबर 1989 को जारी किया गया था। लेकिन अनोहने 16 दिसंबर 1999 को अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाण पत्र की एक डुप्लिकेट कॉपी बनाई। वास्तव में, मदन मोहन सरदार ने बड़ी चतुराई से मूल प्रति को 'पौंड्रा' के बजाय 'मुंडा' लिखकर ज़ेरॉक्स किया। मुंडा ने तब एक डायरी दर्ज की जिसमें प्रमाण पत्र की एक ज़ेरॉक्स कॉपी दिखाते हुए बताया कि प्रमाणपत्र खो गया है। माहिम बाबू ने कहा कि उन्होंने डायरी की कॉपी दिखाकर एक नकल कराई। जब और पूछताछ की गई, तो मदन मोहन सरदार ने बीमारी के बहाने खुद को छिपाने की कोशिश की। मदन मोहन सरदार की मुंडा अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाणपत्र अखिल भारतीय सदरी सुशा एसोसिएशन और अखिल भारतीय आदिवासी बिकास परिषद की ओर से रद्द कर दिया गया ओर एक अफेयार दर्च क़िया गया है ।

अब देखिए कि प्रशासन अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए कितना उत्सुक है। इनमें मदन मोहन सरदार हलफनामे से सरकार बन गए हैं।माहिम बाबू ने कहा कि मदन मोहन सरदार के पास एक मजबूत बुद्धि है और उन्होंने कौशल और बुद्धिमत्ता के साथ एक के बाद एक मिशन लिए हैं क्योंकि वह स्कूल में शामिल हुए हैं ताकि भविष्य में उनके खाली समय में किसी को उन पर संदेह न हो। मदन मोहन सरदार ने चतुराई से सरकार सहित सभी को धोखा देना चाहा। इसके लिए उनेह काली से काली सजा दिया जायगा ।